कविता

हर तारे को चमकने के लिए अंधकार की जरूरत होती है

कोई कितना ही बड़ा हो जाए उसे प्यार की जरूरत होती है
पर जाती हैं दरारें कभी जमीं में भी,

 फटता है उसका भी कलेजा कभी

तब उसकी आग बुझाने को बौछार की जरूरत होती है…

कोई कितना भी बड़ा हो जाऐ उसे प्यार की जरूरत होती है।

#मनिषाझा

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अब कुछ नहीं लिखूँगी

आज कलम की स्याही खत्म हो गई है 

आसमान से माँग लूँ थोड़ा नीला रंग

मगर आज आसमान भी नीला नहीं
आज चाँद भी छुपा हुआ है बादल में 

नहीं शायद अमावस की रात है 

मगर तारे भी तो नहीं हैं 
लिखे हुऐ पन्ने गंदे लग रहे हैं 

कोरे ही अच्छे लगते हैं 

आज कोरा ही रहने देती हूँ 
कुछ लिखने का मन था शायद 

मगर क्या लिखना था

छोड़िऐ अब कुछ नहीं लिखूँगी। 
मनिषा झा

हिंदी 

मेरी हिंदी तुम्हारी हिंदी से अच्छी है 

क्यूँकि तुम हिंदी इसलिए बोलते हो 

कि तुम्हें बोलने आती है 

तुम हिंदी को मात्र एक भाषा समझते हो 

इसलिए तुम करते हो उच्चारण

गंदी गालियों का भी हिंदी में 

हिंदी में अश्लील गाने भी बनाते हो । 

हिंदी कहीं अगर हो जाऐ मुश्किल

तो मिला लिऐ करते हो कुछ दाने

अग्रेंजी के भी । 

मगर मेरे लिऐ हिंदी मेरी पहचान है 

मैं खुद हिंदी हूँ 

हिंदी सभ्यता की बोली है 

हिंदी में क्रोध है ,किंतु गालियाँ नहीं 

अपशब्द नहीं 

हिंदी में प्रेमालाप है अश्लीलता नहीं 

हिंदी हमारे अन्तर्मन की तरह शुद्ध है 

उसमें मिलावट की कोई आवश्यकता नहीं 
#मनिषाझा

अंतिम साँस तक प्रयास करना ही जिंदगी है 

My younger brother saurabh jha , student of std 10 wrote his first blog . I want to post it here . 

अगर मुझसे ‘जिंदगी’ की कोई परिभाषा पुछे तो यही कहुँगा कि निराशा का सामना अपने अंदर पनपती हुई एक आशा के साथ करना ही जिंदगी ह। अपने अंदर की एक छोटी सी किरण का साथ लेकर बाहर के सूर्य को मात देना ही जिंदगी है । आसान शब्दों में कहा जाए तो प्रयासरत होकर किसी फौजी की तरह अंतिम  साँस तक लड़ते रहना , ही जिंदगी है ।

यूँ तो जिंदगी कहें तो यह एक बहुत छोटा सा शब्द लगता है किसी भी इंसान का जीवनकाल मात्र, परंतु इसकी परिभाषा बहुत बड़ी है । 

यह वही जिंदगी है जो रंको को राजा बना देती है और राजाओं को रंक। जो किसी पर्वत को मिट्टी बना देती है और कभी मिट्टी को पर्वत । यह जिंदगी ही है जो बर्फीली पहाड़ी को सागर और सागर को बर्फ बना देती है । 

शरारतों से शूरू हुई ये जिंदगी जो जवानी से सीख ले कर बुढ़ापे की ओर ढलती है इसमें कई उतार चढाव है  जो कभी हमें भगाती है कभी हमें गिराती है मगर रूकने नहीं देती । 

मैं अपने अनुभव से कहूँ तो , हमारी जिंदगी किसी  देश के उस सैनिक की तरह हैं जो यह जानते हुऐ कि वह अपने दुश्मनों के आगे काफी कमजोर है , उसका विरोधी देश उसके आगे काफी मजबुत है , वह फिर भी लड़ता है 

हमारे आगे भी ऐसी कई प्रतिकुल परिस्थितियाँ आती है जो हमें हराने के लिऐ काफी बड़ी होती है मगर हम फिर भी लड़ते हैं और यही जिंदगी है । अगर हम लड़े ही नहीं तो जितेंगे तो कभी भी नहीं । 

जीवन में अगर कभी किसी सफल व्यक्ति को देखो तो इतना जरूर समझना कि उसमें कुछ ऐसे विशिष्ट गुण है जो उसे दुसरों से अलग करती है उसमें लड़ के जीतने का वो जज्बा है जो सब के पास नहीं होता , वरना विरोधी उसे भी कब का हरा देते । 

अब गौर करने की बात यह भी है कि इस संसार में  विशिष्ट गुण सभी के पास होते हैं जरूरत होती है तो बस जज्बे की , और अपने गुण को एक निखार देने की । फौज में भी एक सैनिक की भर्ती प्रशिक्षण के बाद ही ली जाती है , प्रशिक्षण एवं लगातार प्रयास हमारे गुणों को निखारने में कारक होता है। 

इसलिए जिंदगी का सही अर्थ है कि हमें हर उम्मीद हर साँस के साथ प्रयासरत होना चाहिए। यहाँ डरपोकों की कोई अहमियत ही नहीं , यहाँ हर किसी को लड़ना होता है ।

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।


#सौरभझा

महिला क्रिकेट के प्रति हमारी उदासीनता 

आप सभी को बधाई! 
अब आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर ये बधाई क्यों ? हमने तो ऐसा कोई भी परचम नहीं लहराया है ।
तो मैं आपको बता दूँ कल भारतीय महिला क्रिकेट विश्वकप का मैच इंग्लैंड के साथ खेला गया , और इस मैच में भारतीय महिला टीम ने इंग्लैंड की टीम को 35 रनों से मात दी। 
जी हाँ ! मैं आप सभी को इसी जीत की बधाई दे रही हूँ । 
लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि अभी हफ्ते भर पहले हुए भारतीय क्रिकेट टीम (पुरूष) द्वारा खेले गये मैच में हार के बाद आप सभी जिस तरह से निराश हुए थे , या उनके द्वारा किसी मैच को जीतने पर आप सभी जिस तरह खुश होते हैं , आतिशबाजियाँ की जाती हैं , तो इस मैच के जीतने के बाद आप सभी में वैसी ही खुशी क्यूँ नहीं दिखाई दे रही ? 

ना ही आप सभी के फेसबुक पेज पर इस मैच के संदर्भ में एक भी पोस्ट नजर आया, ना ही किसी ने वाट्सएप पर स्टेटस अपडेट किया । 

मैं तो यह कह सकती हूँ कि आप में से अधिकांश लोगों को इस मैच के बारे में पता भी नहीं होगा । 
लेकिन आखिर महिला क्रिकेट के प्रति हम इतने उदासीन क्यूँ है ? हाँ यह बात मानी जा सकती है कि पुरूषों द्वारा खेला जा रहा क्रिकेट हमारे बीच अधिक लोकप्रिय है क्यूँकि आज कई दशकों से हम उसके दर्शक हैं परंतु क्या महिला क्रिकेट टीम के प्रति हमारा कोई दायित्व नहीं है ? 

ना तो किसी को भी इनके मैच को देखने में रूचि है,  ना ही कोई ऐसी टी.वी. चैनल जिसकी टी.आर.पी अधिक हो (जो पुरूषों द्वारा खेले जा रहे क्रिकेट को एडवर्टाईज करती है) के द्वारा महिला क्रिकेट मैच को एडवर्टाईज किया जाता है । 
हमने आज महिलाओं को पुरूषों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चलने का हक तो दे रखा है , आज महिलाओं को हमने हर क्षेत्र में तो उतार दिया है परंतु आज भी उनका स्थान समाज में बहुत ही निम्न है । हम महिलाओं को प्रोत्साहन तक नहीं देना चाहते । यह हमारे समाज के लिऐ बहुत ही दुखद बात है ।

#मनिषाझा

चिराग तले अंधेरा

एक दीपक जो अंधेर कमरे को रोशन करने में सक्षम होता है ,  उसके खुद के तले में हमेशा अंधेरा ही रहता है । वह चारों दिशाओं को प्रज्जवलित करता है ,  मगर खुद के तले के अंधकार को नहीं मिटा पाता । जितनी बड़ी दीपक की लौ होती है , उसके तले अंधेरा उतना ही घना होता है . 

उसी तरह एक मनुष्य जो दुसरों को खुशियाँ बाँटता है,  बहुधा वो अपने परिवार ,अपने आप को खुशियाँ नहीं दे पाता । जो दुसरों के चेहरे पर मुस्कुराहट लाता है , उसके खुद के घर में मुस्कुराहट लाने के लिए कोई भी नहीं होता।

दीपक यदि खुद के तले को रोशन करने लगे तो शायद  वो खुद रोशन ना रह पाये । मगर मनुष्यों के साथ ऐसा नहीं है , प्रत्येक मनुष्य का पहला कर्तव्य है कि वो अपने परिवार को उन्नत बनाऐ । अपना घर , अपना मन सबसे पहले रोशन करे । सबसे पहले अपने घर के सदस्यों  के चेहरे पर मुस्कुराहट लाए , यही एक मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है ।

आप कितने अच्छे व्यक्ति हैं इसका पता इस से कतई नहीं चलता कि आप कितने लोगों के काम आ पाए बल्कि इस से चलता है कि जब आपके अपनों को आपकी जरूरत थी तब आप साथ थे या नहीं ।

भगवान ने इस संसार में हमें सिर्फ इतना दायित्व दिया है , यही हमारा कर्म मात्र है कि हम अपने माता-पिता एवं यदि  स्त्री हैं तो अपने स्वामी , यदि पुरूष हैं तो अपनी स्त्री (जिन्हें हमने ईश्वर को साक्षी मान के ग्रहण किया है ) ,  एवं अपनी संतान , अपने भाई- बहन के प्रति हर कर्तव्य पुरा कर सकें । हम उनकी हर जरूरतों को पुरा कर सकें,  उनके चेहरे पर हर क्षण मुस्कुराहट बरकरार रख सकें ।

 अगर एक मनुष्य अपने कर्तव्य का पालन कर लेता है तो उसका यह जीवन सफल माना जाता है ।
मनिषा झा